झिन रोबे दाई मोर

*झिन रोबे दाई मोर*
झिन रोबे दाई मोर झिन रोबे बाई मोर।
रात दिन गुनत तंय ह झिन रोबे न ss
अकेला ही जाहूँ , कोनो नइ जावय संग म।
झुलत रही मुहरन , तोर नजरे नजर म।
भुइंया म आके , झिन जीयव घमंड म।
काँटा खूँटी झिन गड़व , जिन्गी डहर म।
राख हो जाही ये माटी म काया – 2
पिरीत के बिरवां ल बोंबें न ss
झिन रोबे दाई मोर , झिन ……
लइका ल बने तँय , पढ़ा अउ लिखा के।
ओमन के जिन्गी ल , उज्जर बनाबे।
नान्हे बड़कू रिश्ता , बड़ मान सीखा के।
सुग्घर सिरजा के , भल मनखे बनाबे।
हिम्मत करबे आँसू ल पोछ के – 2
गरु के गठरी ल बोहले न ss
झिन रोबे दाई मोर , झिन ……
छत्तीसगढ़ माटी के , मँय तेरस हव बेटा।
धनहा डोली हय , मोर सोन के डोला।
तहूँ बाप बनबे मोर , दुलरवा तँय बेटा।
लबारी मंदारी छोड़ , बता बे सबो ला।
आवा गमन दुनिया के रिवाज हे -2
मोला खांध म तँय ढ़ोबे न ss
झिन रोबे दाई मोर , झिन …….
झिन रोबे भाई मोर झिन रोबे बेटा मोर।
झिन रोबे बहिनी मोर झिन रोबे दीदी मोर।
रात दिन गुनत तँय ह झिन रोबे न ss – 2
रचना – तेरस कैवर्त्य (आँसू)
  सोनाडुला , (बिलाईगढ़)
जिला – बलौदाबाजार (छ. ग.)
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