डॉ एन के सेठी जी के द्वारा माँ पर रचित कुंडलिनी छंद का रसास्वादन लें(Maa- Dr. N. k. sethi)

विषय-माँ
विधा-कुंडलिनी छन्द
जननी माँ माता कहें , ममता का भंडार।
ईश्वर का प्रतिरूप है,माँ जग का आधार।। 
माँ जग का आधार , माँ  है दुख मोचिनी।
माँ  की शक्ति अपार,माँ है जगत जननी।।
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माँ जैसा कोई नही, माँ का हृदय विशाल।
वात्सल्य से भरपूर है,माँ रखती खुशहाल।।
माँ रखती खुशहाल, माँ त्याग की मूरत है। 
माँ देवी का रूप ,  बड़ी  भोली  सूरत  है।।
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पूजा  वरदान है माँ , गीता  और  कुरान।
माँ का प्यारअमूल्य है,माँ सृष्टि में महान।।
माँ सृष्टि में महान , माँ  जैसा  नही दूजा।
लो माँ काआशीष,माँ भगवान की पूजा।।
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चाहे पूत कपूत हो, मात न होय कुमात।
ईश्वर ने  दी है हमे, यह अद्भुत सौगात।।
यह अद्भुत सौगात , माँ ही प्रथम गुरु है।
प्रेमऔर विश्वास,यह सृष्टि माँ से शुरु है।।
    ©डॉ एन के सेठी
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