तांका

तांका
1
धुंध के फाहे
भोर में सैर करे
छल्ले उड़ाते
सूर्य काँपते आते
दुल्हन सी शर्माते ।।

2
बर्फ से ढँके
झील मैदान बने
पुस का दम
श्वेत कर्फ़्यू लगा के
शीत देता पहरे ।।

3
शीत की बाड़ी
गाजर , मूली , गोभी
बड़ी सुहाती
धुंध , ओस भी पाले
पुस बड़ी मायावी ।।

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