तिरंगा हाथ में ले काफिला जब – जब गुजरता है ( tiranga hath me le ke kafila jab jab gujarta hai – dhaneshvari dewangan)

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तिरंगा हाथ में ले काफिला जब – जब गुजरता है ।
जवानी जोश जलवा देख शत्रु का दिल मचलता है।।

कसम है हिन्दुस्तां की जां निछावर फिर करेंगे हम,
नज़र कोई दिखा दे तो लहू रग – रग उबलता है ।

महक सोंधी मिट्टी की जमीं मेरी सदा महकाये ,
सलामत खूब हिन्दोस्तां रहे झिल-मिल चमकता है।

जरूरत यदि पड़े तो सर कटा दें देश की खातिर ,
जवां इस देश पर कुरबान होने को तरसता है ।

अमन का ताज भारत पे खिले हरदम दुआ करते ,
तिरंगे फूल से आजाद गुलशन अब महकता है।

दुआ हो गर खुदा का हम जनम हर बार लेंगे अब ,
झुकाते शीष हम आशीष हरदम ही झलकता है ।

कहे दिल से “धरा” भी ,फ़क्र करते हैं वतन पर हम ,
तिरंगा हिन्द का अब चाँद पर भी फहरता है।


*धनेश्वरी देवांगन धरा*
*रायगढ़ छत्तीसगढ़*

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