KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

तुम्हारे होने का अहसास(tumhare hone ka ahsas)

———————————-
तुम आसपास नहीं होते
मगर 
आसपास होते हैं
तुम्हारे होने का अहसास
मन -मस्तिष्क में संचित
तुम्हारी आवाज
तुम्हारी छवि
अक़्सर
हूबहू
वैसी-ही
बाहर सुनाई देती है
दिखाई देती है
तत्क्षण
तुम्हारे होने के अहसास से भर जाता हूँ
धड़क जाता हूँ
कई बार खिड़की के पर्दे हटाकर
बाहर देखने लग जाता हूँ
यह सच है 
कि तुम नहीं होते
पर
पलभर के लिए
तुम्हारे होने जैसा लग जाता है
लोगों ने बताया
यह अमूमन 
सब के साथ होता है
किसी के न होने पर भी
उसके होने का अहसास…
नरेन्द्र कुमार कुलमित्र