तुम्हारे होने का अहसास(tumhare hone ka ahsas)

———————————-
तुम आसपास नहीं होते
मगर 
आसपास होते हैं
तुम्हारे होने का अहसास
मन -मस्तिष्क में संचित
तुम्हारी आवाज
तुम्हारी छवि
अक़्सर
हूबहू
वैसी-ही
बाहर सुनाई देती है
दिखाई देती है
तत्क्षण
तुम्हारे होने के अहसास से भर जाता हूँ
धड़क जाता हूँ
कई बार खिड़की के पर्दे हटाकर
बाहर देखने लग जाता हूँ
यह सच है 
कि तुम नहीं होते
पर
पलभर के लिए
तुम्हारे होने जैसा लग जाता है
लोगों ने बताया
यह अमूमन 
सब के साथ होता है
किसी के न होने पर भी
उसके होने का अहसास…
नरेन्द्र कुमार कुलमित्र


(Visited 3 times, 1 visits today)

नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नाम -नरेन्द्र कुमार कुलमित्र जन्मतिथि-04 अक्टूबर,1976 जन्मस्थान- अविभाजित मध्यप्रदेश जिला ग्राम बिलासपुर धोबघट्टी;वर्तमान छत्तीसगढ़ राज्य का मुंगेली जिला। शिक्षा-प्रारंभिक शिक्षा गाँव में, मिडिल स्कूल सुकली, हाई स्कूल बैगाकापा, हायर सेकंडरी छत्तीसगढ़ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,बिलासपुर; स्नातक-सी एम डी कॉलेज बिलासपुर, स्नातकोत्तर पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय,रायपुर; एम ए - दर्शनशास्त्र1999(स्वर्णपदक),हिन्दी 2005 कार्यक्षेत्र- केंद्रीय सरकार द्वारा संचालित जवाहर नवोदय विद्यालय में टीजीटी हिन्दी एवं पीजीटी हिंदी के पद पर 2004 से 2017 तक (13 वर्ष) अध्यापन कार्य। सम्प्रति- 2017 से शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कवर्धा में सहायक प्राध्यापक के पद पर अध्यापनरत उपलब्धि- एम ए दर्शनशास्त्र में स्वर्णपदक, नवोदय विद्यालय समिति द्वारा गुरूपरम सम्मान, केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री द्वारा सी बी एस ई परीक्षा में उत्कृष्ट परिणाम के लिए प्रशस्ति पत्र, राष्ट्रीय स्तर के कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सहभागिता,मतदाता जागरूकता अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कृत एवं सम्मानित। साहित्यिक कार्य-विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।कविता लेखन एवं लघुकथा लेखन रुचि।