KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

दिन गुज़र गए बातें रह गई

दिन गुज़र गए बातें रह गई

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वह दिन गुज़र गए, पर बात रह गई
उसके प्यार में, हस्ती हमारी ढह गई
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याद आती हैं वो बातें जो उसने कही
प्यार किया उसनें,चाहे धोखे में सही
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पल-पल घुटता रहा, उसकी यादों में
जिंदगी हो गई, दफन उसके वादों में
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आज तक याद है , जहरीली वो बातें
उसकी यादों में बिताई, गम भरी रातें
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वो मेरे अथाह दर्द पर हँस कर रह गई
वह दिन गुज़र गए, पर बात रह गई
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प्यार का दर्द क्या है उसने मुझे बताया
उसकी यादों ने, पल-पल मुझे सताया
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बातें उसकी, मधुर-मधुर प्यारी-प्यारी
लगती थी वह मुझे सोन परी सी प्यारी
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उस सोन परी की बातें दिल में रह गई
जिंदगी मेरी उसके हर दर्द को सह गई
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कटुता की ऐसी, आग लगी जीवन में
जैसे हरियाली युक्त, आग लगी वन में
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कटुता की अग्नि में सारी यादें जल गई
वादों की चट्टानें बर्फ की भांति गल गई
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दोनों की पीडाएँ, दर्द बनकर रह गई
वह दिन गुज़र गए, पर बात रह गई

कवि- हेमेन्द्र परमार रूपबास

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