धरती के श्रृंगार(Dharati ke shringaar)

वृक्ष हमारी प्राकृतिक सम्पदा,
धरती के श्रृंगार हैं!
प्राणवायु देते हैं हमको,
ऐसे परम उदार हैं!!
वृक्ष हमें देते हैं ईंधन,
और रसीले फल हैं देते!
बचाते मिट्टी के कटाव को,
वर्षा पर हैं नियंत्रण करते!!
वृक्ष औषधियाँ प्रदान कर,
जीवन सम्भव बनाते हैं!
औरों की खातिर जीना हमको,
परमार्थ भाव सिखलाते हैं!!
वृक्ष सदा दे करके छाया,
पथिकों को विश्राम हैं देते!
मिले इनसे इमारती लकडियाँ,
बदले में नही कुछ लेते!!
वृक्ष हैं जीवन का आधार,
करते दूर प्रदूषण हैं!
वन्य जीवों के आश्रयदाता,
इस धरा के आभूषण हैं!!
वृक्ष लगायें खूब यदि,
चाहें भविष्य की सुरक्षा!
फिर से हरियाली छायेगी,
होगी पर्यावरण की रक्षा!!
*कंचन कृतिका*
*गोण्डा, उ० प्र०*
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