नमन हे विश्ववन्दनीय महावीर(naman hai vishwavandniy mahaveer)

त्याग और अहिंसा की मूर्ति है महावीर।
क्षमा और करूणा का सागर है महावीर।
दर्शन ज्ञान चरित्र की ज्योति है महावीर।
‘रिखब’का नमन हे विश्ववन्दनीय महावीर!
राजा सिद्धारथ के घर जन्में,
माता जिसकी त्रिशला रानी।
तीर्थंकर प्रभु की याद दिलाने,
आई प्यारी महावीर जयन्ति।
चैत्रशुक्ल दिन त्रयोदशी आया,
कुण्डलपुर नगरी अानंद छाया।
दिव्य स्वरूप धरती पर आया,
जन्मदिवस का उत्सव मनाया।
राजमहल में मंगल घड़ियाँ आई,
मृदंग,ढ़ोल, नगाड़े बजी शहनाई।
राजा सिद्धारथ का कुटुंब हर्षाया,
नगरवासियों ने मंगल गीत गाया।
स्वर्णिम मंगल शुभावसर आया,
इंद्र स्वर्ण कलश जल भर लाया।
मेरू पर्वत पर अभिषेक कराया,
देवियों ने लाल पालना झुलाया।
स्वर्ग से वसुधा पर देवगण आए,
प्रभु के दर्शन कर गुणगान गाए।
धन धान्य अभिवृद्धि हुई अपार,
राजकोष में भरा अतुल्य भंडार।
‘जियो और जीने दो’ है महान,
जीव दया का दान है सम्मान।
अहिंसा परमो धर्म से कल्याण,
जैन धर्म का होगा नव निर्माण।
अहिंसा के अवतार है महावीर,
त्याग, तप करूणा के आधार।
श्रीमहावीर जिनशासन सरकार,
‘रिखब’ का वंदन करो स्वीकार।
रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश’
जयपुर राजस्थान
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