KAVITA BAHAR
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नवधा भक्ति नौ दिन ले

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नवधा भक्ति नौ दिन ले

 

नव दिन बर नवरात्रि आये,
सजे माँ के दरबार हे !
जगजननी जगदम्बा दाई के,
महिमा अपरंपार हे !!

एक नहीं पूरा नौ दिन ले
दाई के सेवा करबो !
नवधा भक्ति नौ दिन ले,
अपन जिनगी म धरबो!
अंधियारी जिनगी चक हो जाही,
खुशियाँ आही अपार हे !

ऊँच – नीच जाती – धरम के ,
भितिया ल गिराबो!
मया प्रीत के गारा म संगी
घर कुरिया बनाबो !!
गरीब गुरुवा असहाय बर,
सबो दिन इतवार हे !

दूजराम साहू “अनन्य “

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