नववर्ष की कामना

नववर्ष की यही कामना
हटे दिल से हर दुर्भावना
न काम ऐसा कोई करे
आहत हो जिसमे भावना

मेहनत करे मन्ज़िल मिले
हो दूर सब शिकवे गिले
मिले हौसला,सब काम हो
प्रभु हाथ सबके थामना

फैली हुई अज्ञानता की
तीखी धूप अब चहुँ औऱ है
मुझे ज्ञान दो,मुझे गान दो
मिली अब तलक कोई छाँव ना

मेरी लेखनी में भरना शफा
हर लफ्ज़ इसका स्वर्ण हो
मैं जो लिखूँ उतरे हृदय
करो पूरी मेरी कल्पना

रजनी  श्री बेदी
जयपुर

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