नववर्ष

विषय… नववर्ष
विधा… मुक्तक
*कुसुम* की *कलम* से
शुभ आगमन हे नव वर्ष
वंदन अर्चन हे नूतन वर्ष
अभिनंदन हे नवागत वर्ष
नतमस्तक नमन हे नव्य वर्ष।
खुशियों की सौगात लाना,
रोशनी की बरसात लाना,
चंद्रिका की शीतलता बरसाना
नव सृजन मधुमास लाना।
क्लेष, विषाद,कष्ट मिटाना
जो बीत चुका अतीत बुरा
उसको न तुम पुन: दोहराना
कातर मन का क्रंदन धो जाना।
नफ़रत मिटाना उल्फत जगाना
दर्द का तुम मर्ज़ लाना
सावन प्यासा है मेरे मन का
मधुरिम झड़ी फुहार लाना।
मधुर हास परिहास बनकर
पीड़ा का संसार हरकर,
आहट अपनी मुझको दे जाना
तप्त निदाघ में भी कुसुम खिलाना।
दहलीज़ पर रंगोली बनकर
मेरे मन का बुझा दीप जलाना
बचपन की वो हंसी ठिठोली लाना
कैद है जिसमें खुशियों का खज़ाना।
नव प्रीत लिए नव भाव लिए
आशाओं का अंबार लिए
धीरे से हँसकर आना
नव प्राण जीवन में जगाना।
कितने ही नववर्ष आए
मर्म मन का मेरा समझ न पाए
आतप में भी स्निग्धता लाना
शूलों में व्यथित कुसुम खिलाना।
हे नूतन वर्ष आशा है तुझसे
राग द्वेष रहें दूर मुझसे
रूठे हुए को सद्भाव देना
माँ वीणापाणि का आशीष देना।
हर हाल में हर रूप में
शुभ मंगलमय विहान लाना
सुबरन कलम का धनी बनाना
सर्वे भवन्तु सुखिन:काभाव लाना।
*कुसुम* 
  • नाम… कुसुम लता पुंडोरा

नई दिल्ली

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