KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

नव वर्ष का अभिनंदन(wish you happy new year)

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आज लगने लगा मौसम नया ,
नई कुछ बात है ।
सूरज की रज को छेड़ती
शबनम की बरसात है।
खिल उठे सबके मन की कली
हुई कैसी करामात है।
थिरक रहा गगन पवन
गा रहा डाल पात है ।
जुड़ रहे सब के दिल यहां
बंध रहा एक एक नात है।
उत्सव मनाता जन-जन
मानो इस साल की बारात है।
और सही तो है नव वर्ष आया
दूल्हे की तरह ।
और शायद इसी वजह ।
टूट रहे हैं सबके मन के बंधन।
मेरी तरफ से आप लोगों को
“नव वर्ष का अभिनंदन”।
 मनीभाई ‘नवरत्न’, 

छत्तीसगढ़,