नव वर्ष (चिंतन)

नव वर्ष (चिंतन)

मैने नव वर्ष का उत्सव,नही मनाया है
और ये नव वर्ष क्या,समझ न आया है ,
वही दिन वही रात, कुछ न अंतर पाया है
मैने नव वर्ष का उत्सव नही मनाया है !

न तुम बदले ,न हम बदले
अब काहे को भरमाया है…..मैने…!

गरीब की झोपड़ी बद से बदतर
और भी ये उड़ आया है ………मैने…..!

तेरा गुरूर और मेरा अहम्
आज फिर से टकराया है …..मैने……!

सत्य छोंड कर, झुठ प्रपंच को
आज तुने फिर सिरजाया है….मैने…..!

नैतिक जीवन जीने का,क्या सोचा
क्या तुने कसम खाया है ……मैने……!

न दुर्गूण त्यागे ,न सदगुण अपनाए
बस मोह का जाल बिछाया है ……मैने…..!

आकण्ठ में डूबे, भ्रष्टाचार का
दूर हटाने,कोई कदम उठाया है….मैने……!

राजनीति  से  नेता बने तुम
राजधर्म कहाँ छोड़ आया है ….मैने……….!

जल,जंगल,जमीन की करें  रक्षा
क्या इस पर दीप जलाया है …..मैने……..!

मैने नव वर्ष का उत्सव नही मनाया है .!!!!!

       —- राजकुमार मसखरे
             मु. -भदेरा (पैलीमेटा-गंडई)
             जि.-राजनांदगाँव,( छ. ग. )
                   82250-8297

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