नारी- बाबूलालशर्मा(चौपाई छंद)(Naari)

.          *चौपाई छंद*

 *नारी*
.            ✨✨✨
नारी  रत्न  अमूल्य  धरा पर।
ईश्वर रूप  सकल सचराचर।।
राम  कृष्ण   जन्माने   वाली।
सृष्टि धर्म की सत प्रतिपाली।।१
.         ✨✨✨✨
बेटी बहिन  मात अरु  दारा।
हर प्रतिरूप मनुज उद्धारा।।
नारी जग परहित तन धारी।
सुख दुख पीड़ा सहे दुधारी।।२
.         ✨✨✨✨
द्वय घर  की सब जिम्मेदारी।
बिटिया वहन करे वह सारी।।
पढ़ी लिखी  जब होती नारी।
दो  दो  घर  बनते  संस्कारी।।३
.         ✨✨✨✨
शान  मान  अरमान हमारी।
सुता बहिन पत्नी माँ नारी।।
त्याग  मान  मर्यादा   मूरत।
हर नारी  के  झलके सूरत।।४
.         ✨✨✨✨
शक्ति  प्रदाता  होती  नारी।
बल पौरुष सर्वस  दातारी।।
देश धरा  अरु धर्म बचाती।
नारी  हर  कर्तव्य निभाती।।५
.        ✨✨✨✨
सृष्टि   चक्र   संबल  महतारी।
विधि ने  रची  धरा सम नारी।।
आदि शक्ति से  मनु तन धारी।
रचे प्रथम नर अरु विधि नारी।।६
.         ✨✨✨✨
नारी  है   हर  नर  की  माता।
मानव  तन  की जीवन दाता।।
देव शक्ति बहु महापुरुष जन।
सृजित  किए  नारी ने जीवन।।७
.         ✨✨✨✨
जीव  जगत में है बहु प्राणी।
नारी  है  जग  में  कल्याणी।।
धीर धरा सम  तन तपशीला।
नारी तन अनुपम प्रभु लीला।।८
.        ✨✨✨✨
मनुज अंश  धारे निज  तन  में।
निज जीवन भय करे न मन में।।
उदर भार  सहती   नौ   महिने।
पीड़ा  प्रसव अपरिमित सहने।।९
.        ✨✨✨✨
नहीं  धरा पर  अस तन त्यागी।
नारि शक्ति जग हित बड़भागी।।
शिशु का  पालन  बहु कठिनाई।
सहज   निभाए   यथा  मिताई।।१०
.        ✨✨✨✨✨
सबला  बन  कर  रहना नारी।
तव तन शक्ति छिपी है भारी।।
नर नारी  द्वय  रथ  के पहिये।
कर सम्मान  सुखी नर रहिये।।११
.            ✨✨✨✨
✍©

बाब लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479

(Visited 2 times, 1 visits today)