KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

नारी शक्ति (महिला जागृति)

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

सैलाब को समेटे खुद में

वो शीतल मंद नदी सी बेहती है

और तुझको क्या लगता है नारी शक्तिहीन होती है।

मान सम्मान परंपराओं के आवरण में

वो खुद की क्षमताओं की सीमाओं को बांधे रखती है

और तुझको क्या लगता है नारी शक्तिहीन होती हैं ।

जागृत ज्वाला प्रचंड है वो

पर स्वभाव ठंडी गंगाजल सी रखती है

और तुझको क्या लगता है नारी शक्तिहीन होती है।

कौन जंजीरों में बांध सका है उसको

वो प्रेम वशीभूत अपना सब कुछ समर्पण करती हैं

और तुझको क्या लगता है नारी शक्तिहीन होती है।

कि कैसे आवाहन करूं मैं नारी की जागृति का

वह जागृत देवी स्वरूपा हर रूप में बसती है

और तुझको क्या लगता है नारी शक्तिहीन होती है।