नारी

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विधा ग़ज़ल
मात्रा भार-16×14
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           नारी


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आँखों   से  आंसू   बहते  हैं
पानी   पानी  है  नारी।
दुनियां की नज़रों में बस इक
करूण कहानी है नारी।।
युगों  -युगों  से  जाने  कितने
कितने अत्याचार सहे।
अबला से  सबला तक आयी
हार न  मानी  है  नारी।।
ब्रह्मा   विष्णु   गोद   खिलाए
नाच नचाया नटवर को।
अनुसुइया   है   कौसल्या   है
राधा   रानी   है   नारी।।
एक  नही दो  नही  महज़ इस
के  किरदार  अनेकों  हैं।
कभी   लक्षमी   कभी  शारदे
कभी  भवानी  है   नारी।
महफ़िल  में  रौनक  है इससे
गुलशन  में  बहार  है ये।।
सारी   दुनियां   महा   समंदर
और   रवानी   है  नारी।।
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जयपाल प्रखर करुण
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रवानी–धारा, गति, प्रवाह
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