KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

नावां बछर आगे

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*नावां बछर आगे*
हित पिरित जोरियाइ के एदे आगे रे संगी।
नावां नावां सीखे के करव उदिम,
नावां बछर आगे रे संगी।
जून्ना पीरा बिसरा के , निकता बुता करव ग।
चारी चुगली भूला के , मया के सुरता करव ग।
सत ईमान ल हिरदे म भर ले,
जिन्गी म तोर कदर आगे रे संगी।
नावां बछर आगे रे संगी
नशा ल बैरी बना के, तन ल बने सिरजावव।
नोनी बाबू ल पढ़ा लिखा के, परिवार ल अंजोर करावव।
जम्मो के हांसी मुख म लाके, जिन्गी म तोर सुधार आही रे संगी।
नावां बछर आगे रे संगी।
पान झरे ड़ोंगरी अपन के, हरियाय के परन करले।
सुग्घर होही फूल फुलवारी, जियरा म गुनन करले।
मेहनत कर ले चेत लगाके,
जिन्गी के नावां पीका उलहा जाही रे संगी।
नावां बतर आगे रे संगी।
नावां बछर आगे रे संगी, नावां बछर आगे जी।
नाम बगर जाही रे संगी, नावां बछर आगे जी।
तेरस कैवर्त्य (आँसू)
सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जि. – बलौदाबाजार (छ. ग.)