KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पाती प्रेम की

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पाती प्रेम की

एक पाती प्रेम की
तेरे नाम लिख रहा हूँ,
तेरी आँखों की सुरमई पे
जीवन तेरे नाम कर रहा हूँ।

तेरा आँचल जब लहराये
क्यों मन मेरा हर्षाये
तेरे अधरों की है लाली
तेरी लटकती कान की बाली
तेरे पग पग को कमल
लिख रहा हूँ
इक पाती प्रेम की
तेरे नाम कर रहा हूँ।

यूँ लट से गिरती बुँदे
मोती सा जो दमके
तेरी खनखनाती बोली
तेरी हंसी तेरी ठिठोली
बस यही इकरार कर रहा हूँ
प्रिये प्रेम की प्रथम पाती
तेरे नाम कर रहा हूँ।
कैसे भेजूं किससे भेजूं
दिल का दर्द कैसे सहेजूं
दिन को तेरे लिये रात कह रहा हूँ
प्रिये ये पाती तेरे नाम
कर रहा हूँ।
तेरा खिड़की पे आना वो पर्दा उठाना
उठाकर गिराना
गजब ढा जाता है।
नयनों के बाण से घायल बनाना
रिझाकर हमसे आँखे चुराना
क्यों तुमको भाता है।
तेरी जुल्फों के छांव की
आस ढूंढ़ रहा हूँ।
प्रिये प्रीत की प्रथम पाती
तेरे नाम कर रहा हूँ।।
@अवि
अविनाश तिवारी
अमोरा
जांजगीर चाम्पा