पानी मत बर्बाद कर (pani mat barbaad kar)

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पानी मत बर्बाद कर ,
          बूँद – बूँद अनमोल |
प्यासे ही जो मर गये ,
           पूँछो उनसे  मोल || 1 ||
अगली पीढ़ी चैन से ,
           अगर  चाहते आप |
शुरू करो जल संचयन ,
            मिट जाये सन्ताप || 2 ||
पानी – पानी हो गया ,
           बोतल पानी देख |
रुपयों जैसा मत बहा ,
           अभी  सुधारो रेख || 3 ||
जल से कल है दोस्तो ,
        जल से सकल जहान |
जल का जग में जलजला ,
         जल से अन्न किसान || 4 ||
वर्षा जल संचय करो ,
         सदन  बनाओ  हौज |
जल स्तर बढ़ता रहे ,
         सभी करें फिर मौज || 5 ||
जल को दूषित गर किया ,
          मर   जायें   बेमौत |
‘माधव’ वैसा हाल हो ,
          घर लाये ज्यों सौत || 6 ||
जल जीवन आधार है ,
         और जगत का सार |
‘माधव’ पानी के बिना ,
         नहीं तीज – त्योहार || 7 ||
जल से वन – उपवन भले ,
          भ्रमर  करें  गुलजार |
जल बिन सूना ही रहे ,
           धरा    हरा   श्रंगार || 8 ||
पानी  से  घोड़ा  भला ,
            पानी   से   इंसान |
पानी   से   नारी  चले ,
            पानी  से  ही पान || 9 ||
नीरद , नीरधि नीर है ,
           नीरज नीर सुजान |
‘माधव’ जन्मा नीर से ,
           जान नीर से जान || 10 ||
#नारी = स्त्री , नाड़ी , हल
#जान = प्राण , समझना
#रेख = लाइन , कर्म
#जलजला – प्रभाव , महत्व
#स्वरचित
#सन्तोष_कुमार_प्रजापति_माधव
#कबरई_जिला_महोबा_उत्तर_प्रदेश
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