KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पानी है अनमोल

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~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *’विज्ञ’*

. ? *पानी है अनमोल* ?
. (दोहा छंद)
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*क्षिति जल पावक नभ पवन,*
. *जीवन ‘विज्ञ’ सतोल।*
*जीवन का आधार वर,*
. *पानी है अनमोल।।*
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मेघपुष्प ,पानी सलिल, आप: पाथ: तोय।
*विज्ञ* वन्दना वरुण की, निर्मल मति दे मोय।।
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जनहित जलहित देशहित, जागरूक हो *विज्ञ*।
जीवन के आसार तब, जल रक्षार्थ प्रतिज्ञ।।
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वारि अम्बु जल पुष्करं, अम्म: अर्ण: नीर।
उदकं, घनरस शम्बरं, *विज्ञ* रक्ष मतिधीर।।
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सरिता तटिनी तरंगिणी, द्वीपवती सारंग।
नद सरि सरिता आपगा, जलमाला जलसंग।।
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अपगा लहरी निम्नगा, निर्झरिणी जलधार।
सदा सनेही सींचती, करलो *विज्ञ* विचार।।
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स्वच्छ रखो जल *विज्ञ* नर, नहीं प्रदूषण घोल।
नयन नीर नर नारि रख, पानी है अनमोल।।
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✍©
*बाबू लाल शर्मा बौहरा* ” *विज्ञ*”
*सिकंदरा,दौसा,राजस्थान*
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