KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पिता की अहमियत(pita ki ahamiyat)

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एक अव्वल दर्जे का युवक
नेक और होशियार ।
नौकरी पाने की चाहत में
देने पहुंचा साक्षात्कार ।।
कंपनी डायरेक्टर ने पूछा
युवक का अध्ययनकाल ।
कैसे पढ़ाई में की ,
उसने ढेर सारे कमाल ।।
बिन छात्रवृत्ति के गुदड़ी के लाल ,
कैसे हुआ शिक्षा से मालामाल?
जानने को वह पूछा ,
उसके पिता का हालचाल ।।
युवक ने बताया
वह है धोबी का बेटा ।
पर पिता ने उसको ,
अपने काम में नहीं समेटा।
डायरेक्टर ने जानकर
देना चाहा जिंदगी का सबक।
पहले छुके आओ हाथ पिता का,
तब मिलेगा नौकरी पे हक।
घर पहुंचते ही हँसती आंखें
झरझर बहने लगे।
पुत्र के भविष्य खातिर
पिता के रेगमाल हथेली
संघर्ष गाथा कहने लगे ।।
युवक को एहसास हुआ
आज पहली बार।
बिन व्यवहारिक ज्ञान के
सैद्धांतिक है बेकार ।।
ना बन पाता
आज वह इतना काबिल ।
पिता के संघर्ष बिन ,
कुछ होता ना हासिल ।।
डायरेक्टर ने पहले ही दिन
भर दी भावी मैनेजर में काबिलियत।
जानो तुम भी संघर्ष और
त्यागमूर्ति पिता की अहमियत।।
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़