पिता की अहमियत(pita ki ahamiyat)

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एक अव्वल दर्जे का युवक
नेक और होशियार ।
नौकरी पाने की चाहत में
देने पहुंचा साक्षात्कार ।।
कंपनी डायरेक्टर ने पूछा
युवक का अध्ययनकाल ।
कैसे पढ़ाई में की ,
उसने ढेर सारे कमाल ।।
बिन छात्रवृत्ति के गुदड़ी के लाल ,
कैसे हुआ शिक्षा से मालामाल?
जानने को वह पूछा ,
उसके पिता का हालचाल ।।
युवक ने बताया
वह है धोबी का बेटा ।
पर पिता ने उसको ,
अपने काम में नहीं समेटा।
डायरेक्टर ने जानकर
देना चाहा जिंदगी का सबक।
पहले छुके आओ हाथ पिता का,
तब मिलेगा नौकरी पे हक।
घर पहुंचते ही हँसती आंखें
झरझर बहने लगे।
पुत्र के भविष्य खातिर
पिता के रेगमाल हथेली
संघर्ष गाथा कहने लगे ।।
युवक को एहसास हुआ
आज पहली बार।
बिन व्यवहारिक ज्ञान के
सैद्धांतिक है बेकार ।।
ना बन पाता
आज वह इतना काबिल ।
पिता के संघर्ष बिन ,
कुछ होता ना हासिल ।।
डायरेक्टर ने पहले ही दिन
भर दी भावी मैनेजर में काबिलियत।
जानो तुम भी संघर्ष और
त्यागमूर्ति पिता की अहमियत।।
 मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़