KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

पुनः विश्व गुरु बनेगा भारत

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हम पहले हुआ करते थे विश्वगुरु, हमारी ज्ञान पताका फहराती थी,
सकल चराचर है परिवार हमारा , ये बात हवाएं भी गुनगुनाती थी।

लेकिन आधुनिक बनते भारत ने, खो दिया है विश्व गुरु उपाधि को,
हम बन गए अनुगामी पश्चिम के, पालने लगे हैं व्यर्थ की व्याधि को।

हम भूल बैठे अपनी संस्कृति को, और पश्चिम के पीछे लटक गए ,
दया, धर्म, ज्ञान और प्रकृति के, हम उद्देश्य से थे अपने भटक गए।

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पर आज लौट रहा है मेरा भारत, पुनः अपने मूल प्राचीन पथ पर,
ये वैश्विक शांति का अगुवा बना, हो रहा विश्व गुरु पथ पर अग्रसर।

आज विश्व की सब सभ्यताओं ने, हमारी संस्कृति को गुरु माना है,
पश्चिम के देश चले पूरब की ओर, हमारी ओर देख रहा जमाना है।

भारतीय ज्ञान, विज्ञान और योग को, आज हर राष्ट्र ने अपनाया है, गूंजेगा वसुधैव कुटुंबकम् नारा, आज विश्व ने भारत को बुलाया है।