पुष्पा के दोहे

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दोहा


शक्ति और सामर्थ्य का,
       दीजे प्रभु वरदान।
जन्मभूमि पर कर सकें,
   तन मन धन बलिदान।।
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अरिदल का संहार हो,
       उठे सुदर्शन हाथ।
शक्ति भरो गाण्डीव में,
      मिले पार्थ को साथ।।
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वीर बहादुर देश के,
  रखे वतन की आन।
भारत से आतंक का,
    मेटे नाम निशान।
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पुष्पाशर्मा”कुसुम”

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