पृथ्वी दिवस विशेष : ये धरा अपनी जन्नत है

ये धरा अपनी जन्नत है

ये धरा,अपनी जन्नत है।
यहाँ प्रेम,शांति,मोहब्बत है।

ईश्वर से प्रदत्त , है ये जीवन।
बन माली बना दें,भू को उपवन।
हमें करना अब धरती का देखभाल।
वरना पीढ़ी हमारी,हो जायेगी कंगाल।
सब स्वस्थ रहें,सब मस्त रहें।
यही “मनी” की हसरत है॥1॥


ये धरा ……

चलो कम करें,प्लास्टिक का थैला।
उठालें झाड़ु हाथों में,दुर करें मैला।
नये पौधे लगायें, ऊर्जा बचायें।
रहन-सहन बदल के, पर्यावरण सजायें।
खुद जीयें और जीने दें।
यही तो खुदा की बरकत हैं॥2॥

ये धरा…..

आज विकट संकट है प्रकट हुआ।
ओजोन छतरी में काला चोट हुआ।
ताप बढ़ रही,नदियाँ घट रहीं।
भोग विलास के साधन में,वन चौपट हुआ।
हरा-नीला धरा,श्वेत-श्याम हो रहीं।
इंसान तेरी ही ये हरकत है॥3॥


ये धरा…..

(Visited 3 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे