प्यार करते हो उनको बता दीजिए-कवि बृजमोहन श्रीवास्तव

गजल
212 , 212 , 212 , 212

प्यार करते हो उनको बता दीजिए  ।
आग है इक तरफ तो बुझा दीजिए ।।
उनके खत पढ़के खामोश रहते क्यो ।
खुद को इतनी बड़ी मत सजा दीजिए ।।
फैसला खुद का खुद से करना नही ।
गेंद पाले में उनके गिरा दीजिए ।।
इश्क के इस तराजू  में तौला हमें   ।
प्यार कैसे पड़ा कम बता दीजिए ।।
इस शह़र ही रहते शायद कहीं ।
हो सके आज उनसे मिला दीजिए ।।
आज दिल ये हुआ जाने बैचेन क्यो  ।
नूर *साथी* को इक पल दिखा दीजिए ।।

कवि बृजमोहन श्रीवास्तव “साथी”डबरा

मो. 9981013061

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