KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

प्यार का पहला खत पढ़ने को

0 82

समान्त – आरी
पदांत – आँखें
मात्रा भार – 30
मात्रा पतन – *

?

प्यार का पहला खत पढ़ने को* तड़पी है यारी आँखें,
पिया मिलन की* चाह में अक्सर रोती है सारी आँखें।

सुधबुध खोकर जीता जिसने प्रीत का* रास्ता अपनाया
प्रेम संदेशा पहुँचाये* वो जन – जन तक प्यारी आँखें।

कठिन डगर पनघट की जिसने समझा अक्सर दूर रहा
है* लक्ष्य भेदने में सक्षम अवचेतन वह तारी आँखें।

कलयुग में हो जायें आओ हम द्वापर सा कृष्ण प्रिये
वही बनेगा श्याम यहाँ अब है जिसकी न्यारी आँखें।

मौन की* भाषा बड़ी सहज है जो पढ़ना इसको जाने
ज्ञान सरोवर से अंतर्मन भरती महतारी आँखें।

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कलम से
राजेश पाण्डेय *अब्र*
    अम्बिकापुर

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