प्रार्थना-बाबू लाल शर्मा, बौहरा(SUNO ISHWAR YAHI VINATI)

 *विधाता छंद*
१२२२  १२२२, १२२२  १२२२

   *प्रार्थना*

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सुनो ईश्वर यही विनती,
यही अरमान परमात्मा।
मनुजता भाव मुझ में हों,
बनूँ मानव सुजन आत्मा।
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रहूँ पथ सत्य पर चलता,
सदा आतम उजाले हो।
करूँ इंसान की सेवा,
इरादे भी निराले हो।
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गरीबों को सतत ऊँचा,
उठाकर मान दे देना।
यतीमों की करो रक्षा,
भले अरमान दे देना।
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प्रभो संसार की बाधा,
भले मुझको सभी देना।
रखो ऐसी कृपा ईश्वर, 
मुझे अपनी शरण लेना।
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सुखों की होड़ में दौड़ूँ,
नहीं मन्शा रखी मैने।
उड़े आकाश में ऐसे, 
नहीं चाहे कभी डैने।
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नहीं है मोक्ष का दावा,
 विदाई स्वर्ग तैयारी।
महामानव नहीं बनना,
 कन्हैया लाल की यारी।
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रखूँ मैं याद मानवता,
 समाजी सोच हो मेरी।
रचूँ मैं छंद मानुष हित,
 करूँ अर्पण शरण तेरी।
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करूँ मैं देश सेवा में,
समर्पण यह बदन अपना।
प्रभो अरमान इतना सा, 
करो पूरा यही सपना।
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यही है प्रार्थना मेरी,
सुनो अर्जी प्रभो मेरी।
नहीं विश्वास दूजे पर, 
रही आशा सदा तेरी। 
✍©

बाबू लाल शर्मा, बौहरा
सिकंदरा, 303326
दौसा,राजस्थान,9782924479

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