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प्रेम और सच्चाई-मनीभाई नवरत्न

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प्रेम और सच्चाई -मनीभाई नवरत्न

मैं तुमसे दूर हूं
तो मतलब नहीं कि
तुमसे दूर हूं।
है अब भी मेरे जेहन में
उतना ही प्रेम
जितना कि हुई थी
जिस दिन तुमसे प्रेम ।

मैं तारीफ भी तेरी
उतना ही करूंगा।
जितना तुम लायक हो ।
तुमसे नहीं करूंगा वो वायदा
जो मुझसे हो ना सके।

जितना तुम उठोगे
संग संग तेरे मैं भी उठूंगा ।
या विपरीत इसके
मैं जितना उठ पाऊं अपने शिखर पर
चाहूंगा तुम भी रहो मेरे पास ।

तुम चाहती होगी
दुनिया भर की दौलतें
शोहरतें, ऐशोआराम
बताऊंगा तुम्हें
कुछ भी नहीं इनमें
मेरी दुनिया बस तुम हो ।
तुम जिद करोगी ,
बदलना चाहोगी मुझे शायद ।
अपने खातिर।
मैं छोड़ूंगा नहीं सच्चाई
अडिग रहूंगा
हम दोनों के खातिर ।

तुम भुलाना चाहोगी मुझे
तुम्हें पसंद होगी तुम्हारे अपने
मैं कैसे भुला दूं तुम्हें
जो मुझमें है
वह तुझ में है मेरा अपना
तुम जितना भागोगी मुझसे
मेरे करीब उतना ही होगी।

🖍️ मनीभाई नवरत्न

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