बस यही दासतां हमारी है

बस यही दासतां हमारी है

कुछ  नकद ली है कुछ उधारी है।

बस    यही    दासतां   हमारी  है।।

कुछ  रफ़ू की है और कुछ सी है।

जिंदगी   से   अभी  जंग  जारी है।।

दर्द  से  जिसका  राब्ता हुआ।

ख़ुद  को समझे  बड़ा शिकारी है।।

ज़ख़्म को खोद कुछ बड़ा कीजे।

ज़िंदगी   मौत   से   भी  भारी  है।।

तख़्त  की सीढ़ियाँ  नई  हैं कुछ।

वक्त  की कुछ  कशीदाकारी  है।।

मंज़रे  ख़्वाब से  निकल, अजय।

कह   रही  तुम्हारी   बेक़रारी  है।।

अजय मुस्कान

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अजय कुमार "मुस्कान "

जन्म तिथि - 12 जनवरी 1972 पिता का नाम - श्री जटा शंकर मिश्र माता का नाम - श्रीमती भगवती मिश्र शिक्षा - डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग रोजगार - टाटा स्टील में कार्यरत पता - 32/ L5, क्रास रोड न0-5, एग्रिको, जमशेदपुर – 831009 ( मूल निवासी : मैथिल काशी नगरी ग्राम - बनगाँव, जिला - सहरसा , बिहार ) साहित्यिक विधा - छंदमुक्त कविता / गज़ल/ हास्य - व्यंग्य लेखन भाषा ज्ञान - हिंदी, मैथिली, अंग्रेजी उपलब्धि - दो संयुक्त प्रकाशित पुस्तकें १) प्यारी बेटियाँ- साहित्यपीडिया पब्लिशिंग २) सृजन गुच्छ ( प्रथम )- समदर्शी प्रकाशन  जमशेदपुर से बाहर कई मंचों पर प्रस्तुति  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन  विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित  तकनिकी क्षेत्र में कई राष्ट्रिय सम्मान