बात एक ही तो है(bat ek hi to hai)-मदन मोहन शर्मा ‘सजल’

बात एक ही तो है

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हँस कर तू गुजारे या मैं गुजारूं जिंदगी, 
बात एक ही तो है

यादों में करवट तू बदले या मैं बदलूं, 
बात एक ही तो है।

वफा की रागनी तू बने या मैं बनूं, 
बात एक ही तो है।

प्यार के सफर पर तू चले या मैं चलूं, 
बात एक ही तो है।

सवाल तू बने और जवाब मैं बनूं, 
बात एक ही तो है।

नजरों से घायल तू करे या मैं करूं, 
बात एक ही तो है।

इश्क के दरिया में तू उतरे या मैं उतरूं, 
बात एक ही तो है।

जब लिखना तय है मोहब्बत की दास्तां 
बंजर दिलों में, 
पहल तू करे या मैं करूं
बात एक ही तो है।
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मदन मोहन शर्मा ‘सजल’

कोटा, (राजस्थान)
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