KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

बादल, योद्धा, शिक्षक(badal,yodhdha, shiskyak)

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मैं बादल, आसमान में जाऊंगा ।
संपूर्ण जगत में छा जाऊंगा ।
जल बनके सबकी प्यास बुझाऊंगा।
बागों को फूलों से सजाऊंगा ।
बहारें लाऊंगा ,खुशियां लाऊंगा ।
मैं बादल आसमान में जाऊंगा ।

मैं योद्धा, रण में कूदूंगा ।
छलियों के छक्के छुड़ाऊंगा।
मातृभूमि की लाज बचाऊंगा।
उनको निकासी द्वार दिखाऊंगा।
अमन लाऊंगा ,सुखचैन लाऊंगा ।
मैं योद्धा, रण में कूदूंगा।

मैं शिक्षक, पाठशाला जाऊंगा ।
बच्चों को पाठ पढ़ाऊंगा।
अच्छी शिक्षा से अनुभवी बनाऊंगा।
हर चेहरे पर नए सूरत झलकाऊंगा ।
सबके सपने मैं सजाऊंगा।
साक्षर देश बनाऊंगा ,विकसित देश बनाऊंगा।
मैं शिक्षक पाठशाला जाऊंगा।

मनीभाई ‘नवरत्न’, 

छत्तीसगढ़, 

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