KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

बाबू लाल शर्मा “बौहरा” द्वारा रचित “ईश्वर से पहले कर वंदन”(ishwar se pahle kar vandan)

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 *मत्तगयंद सवैया* 
.  भगण × ७ + २ गुरु,
.  १२,११ वर्ण पर यति
( चार चरण सम तुकांत )
.            *माँ*
.   ……
ईश्वर  से  पहले   कर   वंदन,
शीश झुका पद आयुष पाना।
रीत निभा पर मानव जीवन,
मंगल  कामन  भाव बनाना।
मात पिता,अपने प्रभु को तुम,
मान  सदा  बस  मान बताना।
भाल सजा कर  भू रज चंदन,
जीवन अर्पण  भी कर जाना।
.     ……
पावन भारत  भूमि यहाँ पर,
जीवन मानव का मिल जावे।
मंगल  मूरत  मोद  मना  कर,
माँ गुण गान सभी मिल गावे।

माँ अपनी  बस  माँ सबकी यह,
माँ हित भी खुशियाँ मिल पावे।

जीवन कर्ज उतार सके वह,
शीश समर्पण  औसर आवे।
.   ….…
शारद मातु नमामि चहे मन,
भारत माँ  पद  वंदन गाना।
मानवता हित जीवन अर्पण,
मानस  मानव धर्म  निभाना।
देश धरा पर शीश निछावर,
सैनिक वीर  शहीद कहाना।
दीन दुखी निबलो विकलो हित
भाव भरी  कविता  बन जाना।
.      ……
मात पिता सच संकट मोचन,
शेष सभी  बस  भाव निहारे।
गोकुल ग्वालिन गोधन कानन,
सावन  आवन  बाट  तिहारे।
प्रीत निभे कब पीर मिटे मन,
आय मिले जिन चित्त विचारे।
नंदन  कानन  धेनु  चरावन,
बाल सखा मन मोह निवारे।
.   …..…….
माँ जननी सहती धरती सम,
संतति  के अरमान  सजाती।
पेट रखे महिने वह  नौ तक,
प्राण सहेज,सुआस लगाती।
शीत सहे विपदा घन आतप,
काज सभी घर संग चलाती।
संतति हेतु तजे सुख मारग,
देख सपूत  भरे पय  छाती।
.  …..…….
पूत गये जब देश भले हित,
मात  गुमान  समेत बताती।
भारत मात , सुहाग  रहे यह,
बात जुबान अवश्य जताती।
धीर धरा सम  मात सनातन,
शान हमेश,  स्वदेश  बढ़ाती।
मात  कुमात, बने  न  संभव,
पूत  कपूत  जलावत  छाती।
.    …..…….
बाबू लाल शर्मा “बौहरा”
सिकंदरा, 303326
दौसा,राजस्थान,9782924479
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