KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

बेटी – फूल बागान

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

महिला जागृति पर रचना

बेटी – फूल बागान

गांव, शहर में मारी जाती, बेटी मां की कोख की,
बेटी मां की कोख की, बेटी मां की कोख की।।

जूही बेटी, चंपा बेटी, चन्द्रमा तक पहुंच गई,
मत मारो बेटी को, जो गोल्ड मेडलिस्ट हो गई,
बेटी ममता, बेटी सीता, देवी है वो प्यार की।
बेटी बिन घर सूना सूना, प्यारी है संसार की,
गांव, शहर में मारी जाती, बेटी मां की कोख की।।

देवी लक्ष्मी, मां भगवती, बहन कस्तूरबा गांधी थी,
धूप छांव सी लगती बेटी, दुश्मन तूने जानी थी।
कल्पना चावला, मदरटेरेसा इंदिरागांधी भी नारी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वो तो, झांसी वाली रानी थी,
गांव, शहर में मारी जाती, बेटी मां की कोख की।।

पछतावे क्यूं काकी कमली, किया धरा सब तेरा से,
बेटा कुंवारा रह गया तेरा, करमों का ही फोड़ा है।
गांव-शहर, नर-नारी सुनलो, बेटा-बेटी एक समान,
मत मारो तुम बेटी को, बेटी तो है फूल बागान।।

राकेश सक्सेना, बून्दी, राजस्थान
9928305806