KAVITA BAHAR
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बैठे हैं आकाशतल में- मनीभाई नवरत्न

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बैठे हैं आकाशतल में- मनीभाई नवरत्न

बैठे हैं आकाशतल में, टूटे ना कोई सितारा ।

जो कभी टूटेंगे तारे, हाथ मांग लेंगे तुम्हारा।।

कोई तो मुलाकात होगी, जो पिया साथ होगी ।
कोई तो रात होगी ,जिसमें तुझसे बात होगी ।।
कोई तो बरसात होगी जिसमें मन भीग जाएंगे ।
कोई तो हालात होगी जिसमें वो दिख जाएंगे।।
यह लमहे ना गुजरे तो फलक मेरा अंधियारा ।।


जीवन मेरा राग है, जिसे तुम सुन लेना ।
जीवन में सुराग है ,जिसे तुम बून लेना ।
जीवन मेरा दाग है, जिसे तुम धो लेना ।
जीवन में आग है, जिसे तुम बुझा देना ।
जीवन बाग बाग हो जाएंगे जो मिले तेरा सहारा।।

मनीभाई नवरत्न

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