KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

ब्रज में उड़े ला गुलाल (braj me ude la gulal)

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ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली
खेले होली हो खेले होली
नयना लड़ावे नंदलाल,ब्रज पिया खेले होली
ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली ।।
सखी सब नाचे ढोल बजावे
एक दूजे पर रंग बरसावे
साथ रंग लगाये गोपाल ब्रज पिया खेले होली हो
ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली ।।
धुरखेल करत हैं वृषभानु दुलारी
जोरा जोरी करे मोरे रास बिहारी
पकड़े बईया मोहन रंगे राधे की गाल
ब्रज पिया खेले होली
ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली ।।
पिसी- पिसी भाँग श्यामा प्यारी को पिलावे
मारी-मारी मटकी रसिया सखी को बुलावे
पिचकारी से मचाए धमाल ब्रज पिया खेले होली
ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली ।।
कभी यमुना तट कभी बगीया में
होली में रंग डाले रसिया मोरे अंगिया में
पंचमेवा खिलावे नंदलाल ब्रज पिया खेले होली
ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली ।।
मोहे मन भावे ब्रज की होली
बाल-सखा सब सखीयन की टोली
देखो प्यारे सबको करते निहाल
ब्रज पिया खेले होली
ब्रज में उड़े ला गुलाल ब्रज पिया खेले होली ।।
✍बाँके बिहारी बरबीगहीया ✍
✒सर्वाधिकार सुरक्षित ✒
मोबाइल नंबर- 6202401104

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