भारत महान हो

भारत महान हो
पूजा हो मन्दिरों में,
मस्जिद में अजान हो|
सारे जहाँ से अच्छा,
भारत महान हो ||
फिर कोई तैमूर या
बाबर न आ सके,
कोई लुटेरा लूट कर
हमको न जा सके |
मजहब के नाम पर
फिर यह मुल्क न बंटे –
कोई न कौम प्यार की
मोहताज रह सके |
अरुणाभ छितिज से पुनः
नूतन बिहान हो ||
सारे जहाँ से अच्छा
भारत महान हो ||1।।
सांझ के सुअंक पर
हो भोर की किरण नवल,
नेह से सने – सने हों
चारु-दृग -चषक -कंवल |
झूम- झूम वात -चपल
उर्वी श्रृंगार करे –
धूप -छॉव लीन हो
नित सृजन – विमल |
उत्कर्ष के उद्धोष में
संयम निदान हो |
सारे जहाँ से अच्छा
भारत महान हो ||2!।
चांदनी पुलक भरे
प्राण में अमरता,
द्वार – द्वार बह चले
ले मलय मधुरता |
सूर्य के प्रताप से
शस्य श्यामला ये सृष्टि –
नित नये संधान हो।
हर हृदय प्रचुरता
चिर बसन्त के अधर
पर देश गान हो ||
सारे जहाँ से अच्छा
भारत महान हो ||3!
रचनाकार :-हरिश्चन्द्र त्रिपाठी ‘हरीश ‘
पता :-ई – 85
मलिकमऊ नई कालोनी,
रायबरेली (उ. प्र.) 229010
मोबाइल –9415955693
9125908549
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