KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

भावना तू कौन है ?

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भावना तू कौन है ?

क्रोध लोभ हास मे
रात में प्रकाश में
राग और द्वेष में
प्रीत नेह क्लेश में
देखता हूँ मौन है
भावना तू कौन है?

भय अभय चित्त में
हार में व जीत में
भूख और प्यास में
दूर हो या पास में
देखता हूँ मौन है
भावना तू कौन है ?

अश्रु जब पड़े ढुलक
कांपने लगे अधर
तू बड़ी उदास सी
मन में इक खटास सी
देखता हूँ मौन है
भावना तू कौन है ?

अगर किसी से पट गई
लाज से सिमट गई
तू ऋदय सुवास बन
हाँ! किसी की खास बन
देखता हूँ मौन है
भावना तू कौन है?

पाप और दया में तू
करुणा व हया में तू
जुगुप्सा जिजीविषा
कल्पना मोनालिसा
देखता हूँ मौन है
भावना तू कौन है?

देवी देवता छवि
संत साधु कवि
सब  हैं तेरे  अधीन
पाषाण  तेरे बिन
देखता हूँ मौन है
भावना  तू कौन है ?

लेख हो या निबंध
स्वच्छंद सानुबंध
काव्य में कथा में तू
मन की व्यथा में तू
देखता हूँ मौन है
भावना तू कौन है ?

जल अगन थल गगन
वायु के प्रवाह में
चाह में आह में
हर किसी की राह में
देखता हूँ मौन  है
भावना तू कौन है?

कान में रस घोलती
मौन हो के बोलती
पल रही व पालती
सँवारती व सालती
देखता हूँ मौन  है
भावना तू कौन है?

#सुनील_गुप्ता
केसला रोड
सीतापुर सरगुजा
छत्तीसगढ

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