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मतगयन्द सवैया

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मतगयन्द सवैया सात भगण दो गुरु।211×7+2+2

राम चले वन को सजनी,पिय संग चली सिय राज बिहाई।
लक्ष्मण साथ हुए धनु ले, विनती जननी सन कीन्ह सुहाई ।
भूपति राज समाज सखा विलपे सुनके जननी अकुलाई ।
दैव विधान कठोर कहे सब नैन रहे जल बिंदु बहाई।

पुष्पाशर्मा”कुसुम”