मधुमासी रंग

0 8
मधुमासी रंग*
*नव रंगों* से भर गए ,वन उपवन अरु बाग
केसरिया टेसू हुआ , ढाक लगावे आग ।।
*मधुमासी मद* से भरे सारे तरु कचनार
मस्ती हास् विलास ले ,आयी मधुप बाहर ।।
*ऋतुराज की सुगन्धसे  ,मदमाया परिवेश
शुक पिक  कोकिल कुजते , अपने बैन विशेष ।।
*नटखट वासन्ती* चले ,छेड़ करे बरजोर
देख न पाई आज तक , अन्तस् मन का चोर ।।
*निर्मल नभ* से झांकता , करता   विधु विनोद
ढोल ढप और गीत से , करता मोद प्रमोद ।।
*ललछौंहीं कोपल* हँसी , हसि लताएँ उदास
हृदय झरोखे झांकती ,नेह कोपली  आस ।।
*तरुवर बौराये* हुए , देख  फागुनी रंग
पीले लाल गुलाल का ,मचा हुआ हुड़दंग ।।
*अम्बर सिंदूरी* हुआ ,हुआ समंदर लाल
होली मस्ती रँग भरी , इठला देवे ताल ।।
*दिशा बावरी* हो गयी ,लख मधुमासी रूप।
पहले जैसी न रही ,वी कच्ची से धूप ।।
*फूलों कीफूटी हंसी* , बजे सुनहले पात
सम्मोहन सा बुन रही , अब मधुमासी रात ।।
*ठिठुरायी सर्दी* गयी , अब आया मधुमास ,
,खिल खिल वासन्ती भरे , कण कण बास सुबास ।।
*फूल फूल को चूमते* , भवँर करे गुंजार
रंग बिरंगी तितलियाँ , नाचे बारम्बार ।।
सुशीला जोशी
मुजफ्फरनगर

Leave A Reply

Your email address will not be published.