KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

ममतामयी माँ(mamtamayi maa)

poetry in hindi, hindi kavita, hindi poem,

ममतामयी माँ
(कविता)
लाई दुनिया में पीड़ा सहकर।
बचपन बीता माँ-माँ कहकर।
स्वर्गानंद लिया गोद में रहकर।
आशीष रहा उनका मुझ पर।
एक शख्स में सारी सृष्टि समाई।
वो  माँ, जो ममतामयी कहलाई।
सुबह प्यार से वो,  हमें जगाती ।
भूख से पहले  खाना खिलाती ।
सही राह में चलना सिखलाती ।
हर बुराई  से, लड़ना बतलाती।
रिश्ते-नाते को जो निस्वार्थ निभाई ।
वो  माँ, जो ममतामयी कहलाई।
उसे मेरे पसंद का रहता ख्याल।
मैं खुशनसीब हूँ, जो माँ का लाल।
खुद से ज्यादा करें मेरी देखभाल।
माँ!  तू पूजनीय रहे चिरकाल।
चारदीवारी को, जो घर बनाई।
वो  माँ, जो ममतामयी कहलाई।

️मनीभाई “नवरत्न”
भौंरादादर, बसना, महासमुंद(छ.ग.)