KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

मात् शारदे स्तुति

0 135

मात् शारदे स्तुति

मात् शारदे  सबको वर दे,
तम हर  ज्योतिरग्यान  दें।
शिक्षा से ही जीवन सुधरे,
शिक्षा   ज्ञान  सम्मान  दे।

चले लेखनी सरस हमारी,
ब्रह्म सुता अभि नंंदन  में।
फौजी,नारी,श्रमी,कृषक के
मानवता   हित  वंदन   में।

उठा लेखनी, ऐसा  रच दें,
सारे   काज  सँवर  जाए।
सम्मानित  मर्यादा  वाली,
प्रीत  सुरीत निखर जाए।

पकड़  लेखनी मेरे कर में,
ऐसा  गीत  लिखा दे  माँ।
निर्धन,निर्बल,लाचारों को,
सक्षमता  दिलवा  दे   माँ।

सैनिक,संगत कृषकभारती
अमर त्याग. लिखवा दे माँ।
मेहनत कश व मजदूरों का,
स्वर्णिम यश लिखवा दे माँ।

शिक्षक और लेखनीवाला,
गुरु जग मान, दिला दे माँ।
मानवता से भटके मनु को,
मन  की प्रीत सिखा दे माँ।

हर मानव मे  मानवता के,
सच्चे  भाव  जगा  दे  माँ।
देश धरा पर बलिदानों के,
स्वर्णिम अंक लिखा दे माँ।

शब्दपुष्प चुनकर श्रद्धा से, 
शब्द  माल  में  जोड़ू   माँ।
भाव,सुगंध आप भर देना,
मै  तो  दो ‘कर’ जोड़ूँ   माँ।

मातु कृपा से हर मानव को,
मानव की  सुधि आ  जाए।
मानवता  का  दीप जले माँ,
जन गण मन का दुख गाएँ।

कलम धार,तलवार बनादो,
क्रूर  कुटिलता  कटवा  दो।
तीखे  शब्द बाण  से माता,
तिमिर कलुषता मिटवा दो।
.           ——
सादर©
*बाबू लाल शर्मा*”बौहरा”
सिकंदरा,303326
दौसा,राजस्थान,9782924479

Leave a comment