मुक्तक

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*मुक्तक*
नील गगन में स्वर्णिम आभा, गोरी तुझसे ही छाई ।
सागर की उठती लहरें भी , हैं तेरी ही अंगड़ाई।
टेसू फूले रक्तिम जैसे , तेरे अधरों की लाली।
पूनम के चंदा सी चमके ,  तेरी सुंदर परछाई।।
✍तेजराम नायक

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