मुझे ये पूछते हैं सब मेरे ग़म का सबब* क्या है(mujhe ye puchhate hai sab mere gam ka sabab kya hai)

मुझे ये पूछते हैं सब मेरे ग़म का सबब* क्या है,
ज़माना किस कदर समझे मुहब्बत की तलब क्या है
जो आँखें सो नहीं पाई है ख़्वाबों के बिखरने से
उन आँखों से ज़रा पूछो बिना दीयों के शब* क्या है
अगर बोलूँ किसी से कुछ तो लहज़े में मुहब्बत हो
मुझे घर के बुज़ुर्गों ने सिखाया है अदब* क्या है
तज़ुर्बों को मेरे आँसू से कागज़ पर सज़ाता हूँ
यही तो शाइरी है दोस्त इसमें और ग़ज़ब क्या है
हज़ारों चोट खाकर भी जिसे हासिल नहीं मरहम
भला अब क्या पता उसको दवा क्या है मतब* क्या है
चन्द्रभान ‘चंदन‘*
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* सबब – कारण
   शब – रात
  अदब – इज़्ज़त, आदर
  मतब – अस्पताल
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