मृत्यु

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जन्म लिए जिस घड़ी रेे मानव,
मृत्यु तय हो गई उस दिन!
तन एक वसन बदलते रहे अनेक,
मृत्यु आया काया भी बदलेगी उस दिन!
माया के जाल में मस्त रहे सदा,
मृत्यु ने दस्तक दी चौक गए उस दिन!
राजा,रंक,योगी ध्यानी कोई ना बच पाता,
काल के गाल में समाते हैं जिस दिन!

जनाजे से सिकन्दर जग को बताया,
खाली हाथ जाना है मृत्यु आए जिस दिन!
नश्वर काया संवारे आभूषणों से,
जीवन का अंतिम गहना मृत्यु है
मौत आई तब समझे उस दिन!
जब थमने लगे सांसे सब कर्म नजर आए,
तब चीर निद्रा में सोए मृत्यु है उस दिन!

मृत्यु है जीवन का अंतिम पड़ाव,
आरती थाल सजा रखना मृत्यु आए जिस दिन!
अर्थी को परिजन उठाते कंधे बदल-बदल कर,
जीवन यात्रा का अंत है शमशान में उस दिन!
कर्म ऐसे कर ले रे मानव जग में,
मृत्यु भी प्रणाम करे हमे लेने आए जिस दिन!

स्वरचित
पदमा साहू शिक्षिका
खैरागढ़ जिला राजनांदगांव छत्तीसगढ़

2 Comments
  1. अनाम says

    बहुत बढ़िया रचना

    बधाई हो

    महेन्द्र देवांगन माटी

  2. पद्मा साहू
    पद्मा साहू says

    धन्यवाद महेंद्र जी

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