मेरा देश महान

एक गीत …..
मेरा देश महान भैया !
मेरा देश महान ।।
सिर पर मुकुट हिमालय का है
पावँ पखारे सागर
पश्चिम आशीर्वाद जताता
पूरब राधा  नागर
हर पनघट से
रुन झुन छिड़ती
मधुर मुरलिया तान ।।
नदिया झरने हर दम इसके
कल कल सुर में गावे
कनक कामिनी वनस्पति भी
खिल खिल कर इठलावे
हर समीर हो
सुरभित महके
बिखरे जान सुजान ।।
इसकी हर नारी सावित्री
हर बाला इक राधा
नूतन अर्चन के छन्दों पर
साँस साँस को साधा
प्रेम से पूजते
मानव पत्थर
बन जाते भगवान ।।
इसकी योगिक शक्ति को
हर देश विदेश सराहावे
इसकी संस्कृति को देखो
झुक झुक शीश नवावे
जन गण मन का
भाग्य विधाता
गए तिरँगा गान ।।
रीति रिवाज अलग हैं  इसके
अलग अलग हैँ भाषा
भारतवासी कहलाने की
किन्तु एक परिभाषा
मिल जुल कर
खेतों में काटती
मक्का गेहूँ धान ।।
घायल की गति घायल जाने
मीरा कहे दीवानी
चुनरी का दाग छुड़ाऊँ कैसे
खरी कबीर की बानी
मेरो मन कहाँ सुख पावे
सही सूर का बान ।।
चहल पहल शहरों में इसके
गाँवो में भोलापन
जंगल मे नव जीवन इसके
बस्ती में कोलाहल
कण कण में
आकर्षण इसके
हर मन मे एक आन ।।
सुशीला जोशी
मुजफ्फरनगर
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