युग परिवर्तन-पद्ममुख पंडा महापल्ली(yug parivartan)

युग परिवर्तन

वेद पुराण उपनिषद् ग्रन्थ सब
पुरुषों ने रच डाला
तर्क वितर्क ताक पर रख कर
किया है कागज काला
सदियों से इस धरा धाम में
झूठ प्रपंच रचाया
मानवता को किया कलंकित
भेदभाव अपनाया
ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र में
किया विभाजित जन को
निराधार कारण समाज में
बाँट दिया जन जन को
करके मात्र कल्पना से ही
ईश्वर को रच डाला
और कहा लोगों से
है यह रक्षा करने वाला
संकट की हर घड़ी में
ईश्वर ही एक सहारा
करना निश दिन पूजा इसकी
है सर्वस्व हमारा
वर्णभेद औ जाति प्रथा की
नींव रखी जब उसने
इतना अमंगलकारी होगा
सोचा था तब किसने?
जन्मजात ही ऊंच नीच का
ऐसा पाठ पढ़ाया
हर मनुष्य के मन में विष भर
लोगों.को भड़काया
ब्राह्मण बनकर इस समाज की
कर दी ऐसी तैसी
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई
न जाने कैसी कैसी?
पर मित्रों अब हमें चाहिए
परिवर्तन की ज्योति
नया धर्म हो मानवता की
जग में बिखरे मोती
प्रेम और सद्भाव आज की
सबसे बड़ी जरूरत
हम बदलेंगे युग बदलेगा
बदले जग की सूरत

विचारक पद्ममुख पंडा महापल्ली

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