युवा  चेतना

युवा  चेतना
देश की हालात देख, मेरा मन भर आया।
बाहर शांत और अंदर घनी उदासी छाया।
समाधान के लिए मुझे मेरा मन उकसाया।
दशा सुधार हेतु ,युवा को आधार बनाया।।

युवा के आवारापन ने,   मुझे बैचेन किया।
किंतु जग को उजाला करने हेतु वही दीया ।
देश की हालत जानके भी,युवा अनजाना।
ऐसे युवा को चाहिए,लज्जा से  मर जाना।

शक्ति तुझमें नहीं रही तो पहन ले चूड़ी।
या आगे बढ़ना हो तो मेहनत कर कड़ी।
माना देश की सम्पत्ति,  अंग्रेजों ने लूटा।
पर उस हेतु तो,वीर क्रांतिकारी दल टूटा।

वो ताकत का जज्बा,आज तुझमे कहां है ?
प्रश्न करूं मैं कि वह जोश  तुझमें कहां है ?
मत ऐसा ऊंघो,कि अंग्रेज दुबारा आ जाएं ।
तुम जैसे लाचारों के फिर श्मशान  बन जाए।

कौन कहता है समय नहीं रहा बदलाव में ?
हां!समय ना रहा अब  अविचल ठहराव में ।
प्रगति कर ऐसे, पीढ़ियों तक तेरा असर रहे।
देश ही क्या? परदेश में भी तेरा  कहर रहे।।

देश विकास के लिए एक तू ही बुनियाद है ।
मेरे रचना का आज तुझसे यही फरियाद है।
✒️ मनीभाई ‘नवरत्न’, छत्तीसगढ़
(१५वर्ष पूर्व रचित मेरी रचना जब मैं ११वीं कक्षा में था, आपको समर्पित है।)

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़