KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

ये प्लास्टिक अमर है(ye plastic amar hai)

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ये प्लास्टिक अमर है
धरा के लिये जहर है।
बन रहा है अब खतरा
प्रकृति पर ये कहर है।

करता है जल प्रदुषित
जल रसायन उत्सर्जित
होता है बड़ा जहरीला
अब उत्पादन हो वर्जित

जब पेट्रोलियम खपता है 
तब जाकर यह बनता है।
कभी नहीं यह सड़ता है
भूमि को बंजर करता है ।

शाम, रात अब हर सुबह
घिरा हुआ यह  हर जगह 
ब्रश से लेकर बॉटल तक
सबमें प्रयोग होता है यह

सच जानो ये गुलामी है
स्वास्थ्य के लिये खामी है
आनेवाली पीढियाँ हेतु
हम सबकी बदनामी है ।

कचरा करें क्यों मजबूरी?
ये पुनर्चक्रण हुआ जरूरी
सफाई से अब नाता जोड़ें
आगे बढ़ अब मिटाके दूरी।
✍मनीभाई”नवरत्न”

       छत्तीसगढ़